Tuesday, March 27, 2018

मेरी प्यारी भतीजी


यह कौन है ?





यह तो चांदनी है जो घर में फेल गयी हें ,
 इसे देखकर दूध ओर संगमरमर की छवलताऍ शरमा गयी है !
चाँद ईष्या से जला तो कला पड़ गया , एक विचित्र सयोंग है यह तो सरस्वती की पुत्री है !
ज्ञान की देवी है चंचल लक्ष्मी का अवतार है पर विवेक से भरपूर है !
आओ विकू निजु भेरू शली सुशिला , इस गुलाबो को खूब पयार करे नाचे कूड़े खुशिया मनाये !
इस लड़ो को खूब लाड़ लडाये , कल तो इस की यश और कीर्ति की पताकाऍ दूर दूर तक फहरायेगी !



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