Friday, September 6, 2013

कुछ जीत लिखूँ या हार लिखूँ..
या दिल का सारा प्यार लिखूँ..

कुछ अपनो के ज़ाज़बात लिखूँ या सापनो की सौगात लिखूँ..
मै खिलता सुरज आज लिखूँ या चेहरा चाँद गुलाब लिखूँ..

वो डूबते सुरज को देखूँ या उगते फूल की सांस लिखूँ..
वो पल मे बीते साल लिखूँ या सादियो लम्बी रात लिखूँ..

सागर सा गहरा हो जाऊं या अम्बर का विस्तार लिखूँ..
मै तुमको अपने पास लिखूँ या दूरी का ऐहसास लिखूँ..

वो पहली -पहली प्यास लिखूँ या निश्छल पहला प्यार लिखूँ..
सावन की बारिश मेँ भीगूँ या मैं
आंखों की बरसात लिखूँ..
कुछ जीत लिखूँ या हार लिखूँ..
या दिल का सारा प्यार लिखूँ

Friday, August 2, 2013

" तोड़ा है सिर्फ एक तारा अभी "

तोड़ा है सिर्फ एक तारा अभी,
                     अभी तो लूटनी ये आसमान बाकी है,
देखे है चन्द ही नज़ारे अभी,
                     अभी तो सारा ये जहान बाकी है,
हिला के रख देंगे दम-ख़म से अपने,
                     जो पर्वत सर पे खला की है,
जब तक दिल में तूफानों से,
                    लड़-मरने का अरमान बाकी है.
                             :-सुहानता ‘शिकन’

" आप ही बता दो "



 कौन सा रास्ता अपनी ओर मोडू -आप ही बता दो ?
जिस पर मैं ही मैं अकेला दौडू – आप ही बता दो ?
यकीन कर कर देख लिया,
किसका भरोसा तोडू – आप ही बता दो ?
सब आईने ओर मै पत्थर,
किसका घर फोडू – आप ही बता दो ?
कट जाये जिन्दगी आराम से,
किससे नाता जोडू – आप ही बता दो ?
तरकश में तीर बहुत से हैं,
किस पर निशाना छोडू – आप ही बता दो ?
नमक तो डाला है उसके जख्मों पर,
अब नींबू कब निचोड़ू – आप ही बता दो ?
जी हाँ गलती मेरी ही है “चरन”
अब ठेकडा किसके सर फोडू – आप ही बता दो ?

जिस्म में जान अभी बाकी है ,

जिस्म में जान अभी बाकी है ,
दिल में अरमान अभी बाकी है ,
हौंसलों को उड़ान भरने दो,
पूरा आसमान अभी बाकी है ,
थक हार के रस्ते में सो गया है जो ,
उसके होंठों पे मुस्कान अभी बाकी है ,
बाढ़ में बह गई झोपड़ी तो क्या हुआ,
पेड़ों पे मचान अभी बाकी है ,
सूखी नदी की तलहटी में रेत के नीचे,
पानी का निशान अभी बाकी है ,
ज़िन्दगी ज़द्दोज़हद का नाम है यारों,
आखिरी इम्तिहान अभी बाकी है .